चीन की आजादी और उसका इतिहास
चीन के आधुनिक इतिहास में वर्ष 1945 एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद चीन को पूरी तरह से एक आजाद और स्वतंत्र देश का दर्जा प्राप्त हुआ। हालांकि, इस आजादी के तुरंत बाद ही देश को एक और बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा।
जापान से मुक्ति मिलते ही चीन के भीतर आंतरिक संघर्ष की शुरुआत हो गई। माओ त्से तुंग के नेतृत्व वाले कम्युनिस्टों और चियांग काई-शेक की नेशनलिस्ट पार्टी (कुओमितांग) के बीच सत्ता पर नियंत्रण को लेकर हिंसक जंग छिड़ गई। इस वजह से अगले चार सालों तक (1945 से 1949) पूरा चीन भयंकर गृहयुद्ध (Civil War) की स्थिति से गुजरता रहा।
इस लंबे गृहयुद्ध का अंत आखिरकार 1 अक्टूबर 1949 को हुआ, जब कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत हासिल की और माओ त्से तुंग ने बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर से 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' (PRC) की स्थापना का ऐलान किया। हारने के बाद नेशनलिस्ट नेता ताइवान चले गए। आज हम जिस आधुनिक और शक्तिशाली चीन को देखते हैं, उसकी नींव इसी ऐतिहासिक उथल-पुथल के दौर में रखी गई थी।
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