भारत में शिक्षकों की दुखद स्थिति: कम वेतन और बिना नियुक्ति
भारत में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लाखों शिक्षकों की स्थिति चिंताजनक है। यूनेस्को की हालिया स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2020 के अनुसार, देश के निजी और सरकारी स्कूलों में काम कर रहे 42 प्रतिशत शिक्षक ऐसे हैं जिनके पास न तो स्थायी नौकरी का अनुबंध है और न ही उचित वेतन। ये शिक्षक महीने के औसतन 10,000 रुपये से भी कम कमाते हैं, जो एक गरीबी रेखा से ऊपर जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है।
यह आंकड़ा देश की शिक्षा व्यवस्था की भारी दरारों को उजागर करता है। जिन शिक्षकों पर भविष्य के नागरिकों का निर्माण निर्भर है, उन्हें न सिर्फ़ अनिश्चित रोजगार का सामना करना पड़ता है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी अत्यधिक तनाव में जीते हैं। कई शिक्षक एक से अधिक स्कूलों में पढ़ाते हैं ताकि घर चला सकें, फिर भी उनकी मेहनत को समाज और प्रणाली दोनों में मान्यता कम मिलती है।
इस स्थिति के पीछे कई कार
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