चीन: एक अनोखी आर्थिक पहेली

आज की दुनिया में चीन एक बहुत बड़ी आर्थिक ताकत है। आधुनिक शहर, तेज रफ्तार ट्रेनें और विशाल कारखाने देखकर ऐसा लगता है कि यह किसी भी पश्चिमी देश से कम नहीं है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार चीन को आज भी एक विकासशील देश माना जाता है।

इसकी मुख्य वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, जैसे कि विश्व बैंक, किसी देश की आर्थिक स्थिति मापने के लिए मुख्य रूप से प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) को देखती हैं। उदाहरण के लिए, साल 2014 में चीन की प्रति व्यक्ति नाममात्र जीडीपी लगभग 7,594 डॉलर थी। विशाल आबादी के कारण यह औसत आय देश के हर कोने तक समान रूप से नहीं पहुँच पाती।

दूसरी तरफ, अगर हम तकनीकी विकास, सैन्य ताकत, अंतरिक्ष कार्यक्रमों और वैश्विक व्यापार की बात करें, तो चीन कई मामलों में एक विकसित राष्ट्र की बराबरी करता है। चीन के कुछ बड़े शहर और आर्थिक क्षेत्र बेहद अमीर हैं, लेकिन देश के अंदरूनी और ग्रामीण इलाकों में आज भी गरीबी और विकास की कमी दिखाई देती है। यही वजह है कि चीन अपनी कुल अर्थव्यवस्था में आगे होने के बावजूद, प्रति व्यक्ति आय और क्षेत्रीय असंतुलन के कारण आधिकारिक तौर पर विकासशील देशों की श्रेणी में ही गिना जाता है।

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