चीनी का नाम 'चीनी' कैसे पड़ा?

हम रोज़ाना चाय, मिठाई और पकवानों में जिस मीठी चीज़ का इस्तेमाल करते हैं, उसे चीनी कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे यह नाम कैसे मिला? इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक कहानी छिपी हुई है।

प्राचीन काल से ही भारत में गन्ने के रस से गुड़ और भूरे रंग की शक्कर बनाने की परंपरा रही है। हालांकि, भारत में बनने वाली शक्कर का रंग हल्का भूरा होता था। जब व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के ज़रिए शक्कर बनाने की यह कला चीन पहुंची, तो वहां के लोगों ने इसमें सुधार करने का फैसला किया।

चीन के कारीगरों ने गन्ने के रस को साफ करने और उसे रिफाइन (परिष्कृत) करने की एक नई तकनीक खोजी। इस नई विधि से उन्होंने शक्कर को बिल्कुल सफेद और बारीक क्रिस्टल का रूप दिया। जब यह साफ और चमकीली सफेद शक्कर भारत वापस आई, तो भारतीय लोगों के लिए यह बिल्कुल नई चीज़ थी।

चूंकि यह विशेष सफेद शक्कर चीन से आई थी और वहां के कारीगरों द्वारा तैयार की गई थी, इसलिए भारत में लोगों ने इसे पहचान देने के लिए 'चीनी' कहना शुरू कर दिया। इस तरह भारत की पारंपरिक शक्कर जब चीन से होकर नए रूप में लौटी, तो उसने अपने साथ यह नया नाम भी जोड़ लिया।

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