चेचक: संक्रमण कैसे फैलता है?
चेचक एक अत्यंत संक्रामक बीमारी थी, जो वायरस के कारण होी थी। जैसे ही रोगी के मुंह और गले में पहले घाव या दाने दिखाई देते, वह व्यक्ति संक्रामक बन जाता। इस दौरान खांसी या छींकने से नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से वायरस दूसरों तक पहुंच जाता।
इसका फैलाव बहुत तेज था। एक छींक या खांसी के जरिए हवा में छितरी बूंदें सीधे स्वस्थ व्यक्ति के श्वसन तंत्र में जा सकती थीं। इसीलिए चेचक के मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा रहता था।
रोगी तब तक संक्रामक बना रहता जब तक उसके शरीर के आखिरी दाने की पपड़ी नहीं गिर जाती थी। इस दौरान उसके कपड़े, तौलिये या बिस्तर जैसी चीजों के माध्यम से भी संक्रमण फैल सकता था।
खुशी की बात है कि आज चेचक लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वैश्विक टीकाकरण अभियान के बाद 1980 में इसे दुनिया भर से जड़ से उखाड़ फेंका गया। अब इंसान इतिहास के
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