जापान की सुरक्षा का जिम्मा: आत्मरक्षा सेना (JSDF)
दुनियाभर में हर देश की अपनी एक पारंपरिक सेना होती है, लेकिन जापान की स्थिति थोड़ी अलग और अनूठी है। जापान की रक्षा मुख्य रूप से उसकी आत्मरक्षा सेना (Japan Self-Defense Forces - JSDF) करती है। द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में जापान के आत्मसमर्पण के बाद, देश में बड़े बदलाव हुए। इसी बदलाव के तहत साल 1954 में आधिकारिक तौर पर इस विशेष बल का गठन किया गया था।
जापान के संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत, देश को अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए युद्ध का सहारा लेने या पारंपरिक आक्रामक सेना रखने से रोक दिया गया था। यही वजह है कि इसे 'सेना' के बजाय 'आत्मरक्षा बल' कहा जाता है। JSDF का प्राथमिक उद्देश्य पूरी तरह से रक्षात्मक है—यानी इसका काम केवल जापान की सीमाओं, उसके नागरिकों की संप्रभुता और देश की आंतरिक सुरक्षा की रक्षा करना है, न कि किसी दूसरे देश पर हमला करना। इसके तीन मुख्य अंग हैं: थल सेना (GSDF), नौसेना (MSDF) और वायु सेना (ASDF)।
इसके अलावा, जापान की सुरक्षा में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की भी एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों देशों के बीच हुए एक ऐतिहासिक सुरक्षा समझौते (Treaty of Mutual Cooperation and Security) के तहत, यदि जापान पर कोई बाहरी हमला होता है, तो अमेरिका उसकी रक्षा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। यही कारण है कि जापान में आज भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। हाल के वर्षों में, बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए जापान अपनी सुरक्षा नीतियों को आधुनिक बना रहा है और साइबर सुरक्षा से लेकर तकनीकी रूप से उन्नत हथियारों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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