इस्लाम का उदय और वैश्विक प्रसार

दुनिया में इस्लाम धर्म के प्रसार की शुरुआत सातवीं शताब्दी में अरब प्रायद्वीप से हुई थी। पैगंबर मुहम्मद को जब अल्लाह (ईश्वर) से दिव्य रहस्योद्घाटन और संदेश प्राप्त होने शुरू हुए, तब उन्होंने इस एकेश्वरवादी धर्म की शिक्षाओं को लोगों के बीच साझा करना प्रारंभ किया। शुरुआत में मक्का में उन्हें और उनके अनुयायियों को भारी विरोध और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

इस कठिन परिस्थिति के कारण, वर्ष 622 में पैगंबर मुहम्मद और उनके अनुयायियों को मक्का छोड़कर पड़ोसी शहर मदीना जाना पड़ा। इतिहास में इस यात्रा को 'हिजरत' कहा जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत का प्रतीक बनी। मदीना में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे मुस्लिम समुदाय को एक मजबूत आधार मिला और यहाँ से विश्वास तेजी से बढ़ने लगा।

पैगंबर मुहम्मद के बाद, इस्लाम का प्रसार केवल धार्मिक प्रचार तक सीमित नहीं रहा। खलीफाओं के शासनकाल में व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राजनीतिक विस्तार के माध्यम से यह धर्म अरब से निकलकर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों तक पहुँच गया। मुस्लिम व्यापारियों और सूफी संतों ने अपनी शांतिपूर्ण शिक्षाओं और व्यवहार से दुनिया के विभिन्न कोनों में इस्लाम के संदेश को फैलाया, जिससे आज यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म बन चुका है।

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