आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की शुरुआत और विकास
जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) का इतिहास भले ही पारंपरिक तौर पर पुराना रहा हो, लेकिन आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की असली नींव 1970 के दशक के मध्य में रखी गई थी। इस दौरान वैज्ञानिकों ने आनुवंशिकी और डीएनए रीकॉम्बिनेंट तकनीक के क्षेत्र में कई बुनियादी और अभूतपूर्व शोध किए, जिन्होंने इस क्षेत्र में क्रांति की संभावना जगाई।
वैज्ञानिक नवाचारों के बावजूद, जिस बायोटेक उद्योग को आज हम जानते हैं, उसका वास्तविक जन्म और विकास 1980 के दशक (1980-1989) में हुआ। यह वह समय था जब प्रयोगशालाओं में किए गए शोध और वैज्ञानिक खोजें केवल कागजों तक सीमित न रहकर व्यावसायिक उत्पादों के रूप में बाजार में उतरने लगीं।
1980 के दशक में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए जीवन रक्षक दवाओं, इंसुलिन, और उन्नत टीकों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन संभव हो सका। इसने न केवल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदली, बल्कि कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में भी नए रास्ते खोले। इस तरह 1980 का दशक जैव प्रौद्योगिकी को एक प्रयोगशाला अनुसंधान से उठाकर वैश्विक उद्योग के रूप में स्थापित करने वाला काल साबित हुआ।
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