त्रिलोकी के स्वामी भगवान विष्णु
भारतीय पौराणिक कथाओं और सनातन संस्कृति में ब्रह्मांड को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित माना गया है, जिन्हें तीन लोक कहा जाता है—देवलोक (स्वर्ग), भूलोक (पृथ्वी) और पाताल लोक। इन सभी लोकों की रचना, संचालन और उनकी व्यवस्था बनाए रखने की सर्वोच्च जिम्मेदारी देवताओं के पास होती है।
इन तीनों लोकों के अधिपति या राजा के रूप में श्री हरि विष्णु नारायण को पूजा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु पूरे ब्रह्मांड के पालनहार हैं। वे अपनी योगनिद्रा और विभिन्न अवतारों के माध्यम से तीनों लोकों में धर्म की स्थापना करते हैं और हर संकट से सृष्टि की रक्षा करते हैं।
सनातन परंपरा में उन्हें समस्त चराचर जगत का संरक्षक माना गया है, जो बिना किसी भेदभाव के देव, मनुष्य और पाताल वासियों—सभी का ध्यान रखते हैं।
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