भारत और तुर्की के द्विपक्षीय संबंध: इतिहास और वर्तमान स्थिति
भारत और तुर्की के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं, लेकिन आधुनिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत 20वीं सदी के मध्य में हुई। 5 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद, तुर्की ने तुरंत भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते स्थापित हुए।
शुरुआती दौर में गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव के बावजूद, दोनों देशों के राजनीतिक संबंध वैसी गति नहीं पकड़ सके जैसी उम्मीद की जा रही थी। इसका मुख्य कारण वैश्विक राजनीति थी। शीत युद्ध (Cold War) के दौरान दोनों देश अलग-अलग गुटों में बंट गए थे। तुर्की जहां पश्चिमी गठबंधन और नाटो (NATO) का प्रमुख हिस्सा बन गया, वहीं भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का मार्ग चुना। इस वैचारिक अंतर के कारण द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रकार का ठहराव आ गया।
समय के साथ दोनों देशों ने अपने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है। आज बॉलीवुड फिल्में, भारतीय व्यंजन और पर्यटन तुर्की में काफी लोकप्रिय हैं, जबकि भारतीय पर्यटक भी तुर्की की समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों को देखना पसंद करते हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच व्यापार में निरंतर वृद्धि देखी गई है। हालांकि, कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के रुख और पाकिस्तान के साथ उसकी निकटता के कारण राजनीतिक तनाव कभी-कभी सामने आ जाता है। इसके बावजूद, दोनों देश जी-20 (G20) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ जुड़ाव बनाए हुए हैं।
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