चिड़िया दादी माँ का घोंसला

गाँव के एक छोटे से घर में, जहाँ खुले आँगन में एक बड़ा पेड़ था, वहीं एक छोटी सी चिड़िया दादी माँ के साथ रहती थी। यह कोई साधारण चिड़िया नहीं थी — वह दादी माँ की सच्ची सख़ी थी।

चिड़िया दादी माँ के आँगन के पेड़ पर बने एक छोटे से घोंसले में रहती थी। वह हर सुबह पहली किरण के साथ गाना गाकर दादी माँ को जगाती। दादी माँ उसे दाना देतीं, और वह खुशी से झूलते हुए पंख फैला देती।

यह घोंसला सिर्फ एक आश्रय नहीं था, बल्कि उन दोनों के बीच लगाव की निशानी था। बच्चे अक्सर उस पेड़ के नीचे बैठकर चिड़िया को देखने आते थे। कोई कहता — "ये तो दादी माँ की असली सख़ी है!"

मार्च 2021 तक तो वह घोंसला वहीं था। फिर एक दिन चिड़िया ने अपने बच्चों को उसी घोंसले में पाला। दादी माँ ने उन्हें देखकर मुस्कुरा दिया, मानो कह रही हों — "मेरा घर अब और भी सुंदर हो गया है।"

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