जीवन और मृत्यु: अंतिम सत्य
हम सभी कभी न कभी सोचते हैं—दुनिया का अंतिम सत्य क्या है? इस सवाल का जवाब ढूंढते हुए हजारों सालों से ऋषि-मुनि, दार्शनिक और साधक विचार करते आए हैं। और उनमें से अधिकांश का सहमति एक ही बात पर है—जीवन और मृत्यु इस संसार का सबसे बड़ा और शाश्वत सत्य है।
जैसे नदी का पानी बहता है, वैसे ही समय बीतता जाता है।हर प्राणी को जन्म मिलता है, और उसकी एक न एक दिन मृत्यु भी होनी है। यह कोई दुखद बात नहीं, बल्कि प्रकृति का नियम है। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर। इसलिए मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि परिवर्तन का हिस्सा माना जाता है।
इस सत्य को समझना ही जीवन की सच्ची शिक्षा है। जब हम इस बात को अपने दिल में उतार लेते हैं कि सब कुछ अस्थायी है, तो लालच, घृणा और अहंकार से मुक्ति मिलती है। हम जीना सीखते हैं—पूरे मन से, बिना डरे, बिना झंझट के।
मृत्यु के भय से मुक्त होकर ही जीवन का सच्चा आनंद मिलता है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।