संसार के प्रथम मनुष्य: मनु और शतरूपा

दुनिया की उत्पत्ति और पहले इंसान को लेकर हर संस्कृति में अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। सनातन धर्म और हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस सृष्टि के सबसे पहले पुरुष स्वायंभुव मनु थे और पहली स्त्री शतरूपा थीं। इन्हीं दोनों से संसार में मानव जीवन की शुरुआत हुई, इसलिए मनु की संतानों को 'मनुष्य' या 'मानव' कहा जाता है।

पौराणिक ग्रंथों में इस दिव्य रचना की एक बेहद दिलचस्प कथा मिलती है। मान्यता है कि जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया, तो उन्होंने 11 प्रजापतियों और 11 रुद्रों की रचना की। इसके बाद उन्होंने संसार को आगे बढ़ाने के लिए अपने शरीर को दो भागों में विभाजित कर लिया। ब्रह्मा जी के इन दो हिस्सों में से एक भाग का नाम 'का' और दूसरे भाग का नाम 'या' रखा गया। इन्हीं दो रूपों से काया यानी शरीर की संकल्पना हुई।

भगवान ब्रह्मा के शरीर के पहले हिस्से से पुरुष के रूप में स्वायंभुव मनु प्रकट हुए और दूसरे हिस्से से स्त्री के रूप में शतरूपा का जन्म हुआ। इन दोनों के मिलन से ही पृथ्वी पर मानव सभ्यता की नींव पड़ी। दुनिया के अलग-अलग धर्मों में भी इसी तरह की कहानियां मिलती हैं, जैसे ईसाई और इस्लाम धर्म में आदम और हौवा (इव) को पहला इंसान माना गया है। लेकिन भारतीय दर्शन के नजरिए से मनु और शतरूपा ही इस धरती के आदि पूर्वज हैं, जिन्होंने मानव जाति को आगे बढ़ाया।

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