देवताओं के माता-पिता और उनका दिव्य परिवार

सनातन धर्म और पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं के माता-पिता के रूप में प्रजापति दक्ष की पुत्री अदिति और महर्षि कश्यप को जाना जाता है। माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने के कारण ही देवताओं को 'आदित्य' भी कहा जाता है। अदिति के पिता का नाम प्रजापति दक्ष और माता का नाम वीरणी (प्रसूति) था। इस प्रकार, प्रजापति दक्ष देवताओं के नाना थे।

माता अदिति की कई बहनें थीं, जिनमें दिति, कद्रू, विनता, दनु, सुरसा और सती मुख्य हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इन सभी बहनों का विवाह महर्षि कश्यप से ही हुआ था। जहाँ एक ओर अदिति से देवताओं की उत्पत्ति हुई, वहीं उनकी बहन दिति से दैत्यों (असुरों) और दनु से दानवों का जन्म हुआ। इस तरह देवता और असुर सौतेले भाई थे।

माता अदिति की प्रमुख संतानें:

अदिति के बारह पुत्र हुए, जिन्हें 'द्वादश आदित्य' कहा जाता है। इनमें स्वर्ग के राजा इन्द्र, भगवान सूर्य (विवस्वान्), वरुण, मित्र, अर्यमा, भग, अंश, धाता, पूषा, त्वष्टा, पर्जन्य और स्वयं भगवान विष्णु के अवतार वामन देव शामिल हैं। माता अदिति की सवारी के रूप में पौराणिक आख्यानों में मुर्गे का उल्लेख मिलता है, जो सूर्योदय और नई चेतना का प्रतीक माना जाता है।

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