सिनेमा का नया दौर: जब पर्दे पर गूंजी देश की पहली बोलती फिल्म
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 14 मार्च 1931 का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह वह दिन था जब मुंबई के मैजेस्टिक सिनेमा हॉल में देश की पहली बोलती फिल्म यानी 'टॉकी' रिलीज हुई थी। इस फिल्म का नाम 'आलम आरा' था, जिसे जाने-माने फिल्मकार आर्देशिर ईरानी ने निर्देशित किया था।
इससे पहले भारत में मूक फिल्में यानी बिना आवाज वाली फिल्में बनती थीं, जिन्हें देखने का अनुभव आज के दौर से बिल्कुल अलग था। 'आलम आरा' के आने से न सिर्फ पर्दे के कलाकारों की आवाज दर्शकों तक पहुंची, बल्कि इसने भारतीय मनोरंजन जगत की दिशा ही बदल दी। फिल्म में संगीत और गानों ने भी दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी।
दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के रिलीज होने के ठीक 84 साल बाद, 14 मार्च 2015 को इस ऐतिहासिक उपलब्धि को याद करते हुए गूगल ने अपना डूडल भी समर्पित किया था। 'आलम आरा' ने भारतीय सिनेमा को एक नई आवाज दी, जिसकी गूंज आज भी बॉलीवुड की हर एक कहानी में सुनाई देती है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।