द्रौपदी के पांच पति क्यों थे?

महाभारत की महानायिका द्रौपदी के पांच पति होने की कथा आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। कहानी कहती है कि द्रौपदी अपने पिछले जन्म में एक अत्यंत सुंदर और गुणवान युवती थी। उसके इतने गुण थे कि कोई भी एक व्यक्ति उसके सभी गुणों के योग्य नहीं लगता था। इसी वजह से वह अपने लिए उचित वर ढूंढने में असमर्थ रही।

तब उसने भगवान शंकर (शिव) की कठोर तपस्या की। जब भगवान प्रकट हुए, तो द्रौपदी उत्सुकता और हड़बड़ाहट में पांच बार वर मांग बैठी — पहला, ऐसा पति जो सुंदर हो; दूसरा, जो बलवान हो; तीसरा, जो वीर हो; चौथा, जो धर्मात्मा हो; और पांचवां, जो ज्ञानी हो।

शिवजी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि इस जन्म में वह पांच पतियों की धर्मपत्नी बनेगी। यही कारण है कि द्रौपदी ने यज्ञ में धनुष उठाने की चुनौती के बाद पांडवों से विवाह किया और भीष्म, द्रोण और कृष्ण के सामने घोषित हुआ कि वह सभी पांच भाइयों की एक साथ पत्नी होगी।

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