भारत का विदेशी कर्ज: आंकड़े और सच्चाई

किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए उसके विदेशी कर्ज (Foreign Debt) का आकलन करना बेहद जरूरी होता है। अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश पर कितना कर्ज बढ़ा है और इसकी मौजूदा स्थिति क्या है।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले भारत पर लगभग 409 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था। समय के साथ अर्थव्यवस्था के विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह आंकड़ा बढ़ता गया। वर्ष 2022 तक यह कर्ज बढ़कर लगभग 615 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो कि पहले के मुकाबले करीब डेढ़ गुना था।

हालांकि, केवल कुल रकम देखकर किसी अर्थव्यवस्था को आंकना सही नहीं होता। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश के कर्ज की समीक्षा उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में की जानी चाहिए। भारत की जीडीपी के मुकाबले विदेशी कर्ज का अनुपात काफी हद तक नियंत्रित और सुरक्षित सीमा में माना जाता है। इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में देश की साख बनी हुई है।

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