नागों के गुरु कौन हैं?
भारतीय संस्कृति में नागों को हमेशा रहस्यमय और पवित्र माना गया है। कई कथाओं और पुराणों में नागों का विशेष स्थान है। ऐसा माना जाता है कि नाग, नाथ और नागा परंपरा की जड़ें गुरु दत्तात्रेय से जुड़ी हैं।
दत्तात्रेय, जिन्हें त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतार माना जाता है, आध्यात्मिक ज्ञान और तपस्या के प्रतीक हैं। उन्हें अक्सर सांपों के घेरे में, जंगल में ध्यानमग्न अवस्था में चित्रित किया जाता है। यही नहीं, कई संत और योगी जो नागा संप्रदाय से जुड़े हैं, वे भी दत्तात्रेय को अपना आदि गुरु मानते हैं।
नागों की परंपरा को लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ क्षेत्रों में नागों को भूमि की रक्षा करने वाली शक्ति माना जाता है, तो कुछ जगह उन्हें जल और वरुण का प्रतीक माना जाता है। नाथ संप्रदाय के योगियों ने भी नागों के साथ गहरा संबंध बनाया। इन सभी को जोड़ने वाली आध्यात्मिक धारा दत्तात्रेय ही माने जाते हैं।
इस तरह, नागों के गुरु के र
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।