नीली आंखों वाले बच्चों का सच और विज्ञान

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ बच्चों की आंखें इतनी खूबसूरत नीली क्यों होती हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि पूरी तरह से विज्ञान और हमारे शरीर का एक प्राकृतिक गुण है जिसे मेलानिन कहा जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, भूरी या काली आंखों में मेलानिन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है, जो सूरज की रोशनी को ज्यादा सोखती है। इसके विपरीत, नीली आंखों वाले लोगों में मेलानिन सबसे कम होता है। दिलचस्प बात यह है कि नीली आंखों की ऊपरी परत यानी स्ट्रॉमा (Stroma) में कोई नीला रंग नहीं होता। असल में, जब प्रकाश किरणें इस परत से टकराती हैं और अलग-अलग वेवलैंथ में बिखरती हैं, तो हमें आंखें नीली नजर आती हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे आसमान का रंग नीला दिखाई देता है।

छोटे बच्चों के जन्म के समय उनकी आंखें अक्सर नीली या हल्कीस्लेटी होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जन्म के शुरुआती महीनों में मेलानिन का उत्पादन पूरी तरह नहीं हुआ होता। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और धूप के संपर्क में आता है, उसकी आंखों में मेलानिन की मात्रा बढ़ने लगती है। यही वजह है कि कई बच्चों की नीली आंखें आगे चलकर भूरी या गहरी हो जाती हैं, जबकि कुछ बच्चों में यह आजीवन नीली ही बनी रहती है।

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