ज्योतिष के अनुसार नौकरी पाने के लिए कौन से ग्रह जिम्मेदार हैं?

हमारे जीवन में एक अच्छी नौकरी पाना सफलता की राह में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार हमारी कुण्डली के ग्रह भी इसमें एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? जब भी किसी व्यक्ति को नई नौकरी मिलती है, तो उसके पीछे ग्रहों की विशेष चाल और दशा का गहरा प्रभाव होता है।

ज्योतिष शास्त्र में दशम भाव (10th House) को कर्म, करियर और नौकरी का भाव माना गया है। इसके साथ ही, दशम भाव का स्वामी यानी दशमेश नौकरी के समय में सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाता है। मुख्य रूप से शनि और गुरु (बृहस्पति) को करियर का मुख्य कारक ग्रह माना गया है।

नौकरी मिलने के योग कब बनते हैं? आइए इसे मुख्य बिंदुओं से समझें:

1. शनि और गुरु का संबंध: जिस समय व्यक्ति को नौकरी मिलती है, उस समय गोचर में शनि या गुरु (या दोनों) का संबंध कुण्डली के दशम भाव या दशमेश से जरूर बनता है। शनि कर्म का फल देने वाले देवता हैं और गुरु शुभता और वृद्धि के प्रतीक हैं।

2. शनि और राहु की स्थिति: करियर में नए अवसर और नौकरी के योग तब भी बहुत मजबूत होते हैं जब शनि और राहु गोचर में एक-दूसरे से केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भावों में स्थित होते हैं।

3. महादशा और अंतरदशा का प्रभाव: व्यक्ति को नौकरी तभी मिलती है जब उसकी चल रही दशा या अंतरदशा का संबंध किसी न किसी रूप में दशम भाव या दशमेश से हो रहा हो। सही समय पर सही ग्रह की दशा ही करियर की राह खोलती है।

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