परमेश्वर कौन है?

परमेश्वर के बारे में सोचते हुए, हम अक्सर यह जानने की कोशिश करते हैं कि वह कौन सा भगवान है। लेकिन सच तो यह है कि परमेश्वर किसी एक रूप या नाम तक सीमित नहीं है। वह सभी धर्मों, संप्रदायों और संस्कृतियों में एक ही है – सृष्टि का स्रोत, सबके हृदय में विराजमान अनंत सत्ता।

कुछ लोग उन्हें राम, कुछ कृष्ण, कुछ अल्लाह या ईश्वर कहते हैं। लेकिन नाम और रूप अलग होने के बावजूद, परमेश्वर वह एक आत्मा है जो सबमें फैला हुआ है। वह न केवल मंदिर, मस्जिद या चर्च में बसते हैं, बल्कि हर प्राणी के भीतर उपस्थित हैं।

गीता में कृष्ण कहते हैं – “सर्वत्र समदृष्टिः सुखदु:खेषु च” – जो जीव एक समान दृष्टि रखता है, उसी में परमेश्वर झलकते हैं। इसलिए परमेश्वर को ढूंढने के लिए न तो दूर कहीं जाना पड़ता है, न ही किसी विशेष प्रतिमा या मंदिर पर निर्भर रहना पड़ता है। वह तो हमारे भीतर ही बसते हैं – अपने कर्मों की शुद्धता, दया और निष्काम भाव में।

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