पाकिस्तान का विदेशी कर्ज: अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में लगातार विफलता का सामना करना पड़ रहा है। विदेशी सहायता और कर्ज पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पाकिस्तान का वित्तीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान ने एक ही वित्तीय वर्ष के पहले 10 महीनों (जुलाई-अप्रैल 2021-22) के दौरान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से लगभग 13.033 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज लिया। इस भारी-भरकम राशि में विदेशी वाणिज्यिक बैंकों से लिया गया 2.623 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज भी शामिल है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और मित्र देशों से बार-बार कर्ज लेने के बावजूद पाकिस्तान में महंगाई और मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर है। पाकिस्तानी रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे जरूरी चीजों का आयात बेहद महंगा हो गया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नया कर्ज लेना समाधान नहीं है। जब तक देश में संरचनात्मक सुधार, व्यापार घाटे में कमी और सही आर्थिक नीतियां लागू नहीं होंगी, तब तक इस संकट से उबर पाना कठिन रहेगा।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय