पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ से दूर क्यों रहना?

कई लड़कियों और महिलाओं ने कभी न कभी सवाल किया है – पीरियड्स के दौरान भगवान को क्यों नहीं छूना चाहिए? इसके पीछे धार्मिक या अंधविश्वास जैसी बातें नहीं, बल्कि सामाजिक और शारीरिक पहलू छिपे हैं।

पुराने समय में मंत्रोच्चार और अनुष्ठानों को बेहद शुद्धता के साथ करने की परंपरा थी। उस जमाने में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को काफी दर्द, थकान और हार्मोनल उथल-पुथल का सामना करना पड़ता था। लंबे समय तक बैठकर पूजा करना या मंत्र जपना उनके लिए मुश्किल हो जाता था।

इसीलिए समाज ने उन्हें पूजा-स्थल से दूर रखने की परंपरा बना दी, ताकि वो आराम कर सकें। यह नियम उनकी सेहत को ध्यान में रखकर बना, न कि अछूत के भाव से। हालांकि, आज जब विज्ञान और चिकित्सा ने काफी आगे कदम बढ़ाया है, तो कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी सामान्य जीवन जीती हैं और पूजा में शामिल होती हैं।

अब यह तय करना हर महिला के अपने शरीर और भावनाओं

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