पीली सरसों और काली सरसों में क्या अंतर है?

भारतीय रसोई में सरसों का एक खास स्थान है, लेकिन अक्सर लोग पीली सरसों और काली सरसों को लेकर थोड़े भ्रमित हो जाते हैं। यद्यपि दोनों एक ही पौधे के परिवार से आते हैं, फिर भी इनके स्वाद, इस्तेमाल और फायदों में काफी अंतर होता है।

काली सरसों के दाने छोटे और काले या गहरे भूरे रंग के होते हैं। इनका स्वाद थोड़ा तेज और तीखा होता है। उत्तर और पूर्व भारत के पकवानों में तड़का लगाने के लिए अक्सर काली सरसों का प्रयोग किया जाता है। इसके विपरीत, पीली सरसों का स्वाद थोड़ा हल्का और मीठापन लिए होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से अचार बनाने, करी को गाढ़ा करने और बंगाली पकवानों में किया जाता है।

रसोई में उपयोग के अलावा, सरसों का हमारे इतिहास और संस्कृति से भी गहरा नाता रहा है। सरसों के दानों की तुलना में राई का दाना बहुत छोटा होता है। एक समय था जब हमारे देश में छोटी-छोटी कीमतों या तौल का हिसाब लगाने के लिए राई और रत्ती जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था। पुराने जमाने में जब एक रुपये में सोलह आने होते थे, तब बहुत छोटे मूल्य के लिए राई को एक पैमाने के रूप में देखा जाता था।

सेहत के लिहाज से भी दोनों ही सरसों बहुत फायदेमंद हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन को सुधारने और शरीर को गर्माहट देने में मदद करते हैं।

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