क्या पुराण श्रुति का हिस्सा हैं?

सनातन धर्म में हमारे प्राचीन ग्रंथों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: श्रुति और स्मृति। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि पुराण श्रुति हैं या स्मृति।

श्रुति का शाब्दिक अर्थ है "जो सुना गया है"। यह वह ज्ञान है जिसे ऋषियों ने ध्यान की गहराई में ईश्वर से सीधे प्राप्त किया था। इसमें मुख्य रूप से चार वेद और उपनिषद शामिल हैं। दूसरी ओर, स्मृति का शाब्दिक अर्थ है "जो याद रखा गया है"। यह वैदिक परंपरा के बाद का संपूर्ण संस्कृत साहित्य है, जिसे ऋषियों ने अपनी याददाश्त और अनुभवों के आधार पर आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन के लिए लिखा था।

अगर हम पुराणों की बात करें, तो पुराण श्रुति नहीं बल्कि स्मृति की श्रेणी में आते हैं। स्मृति साहित्य अत्यंत व्यापक है और इसमें पुराणों के अलावा वेदांग, षड्दर्शन, इतिहास (जैसे रामायण और महाभारत), उपवेद, तंत्र और आगम भी शामिल हैं।

जहाँ श्रुति को धर्म का सबसे मौलिक और अपरिवर्तनीय आधार माना जाता है, वहीं पुराणों जैसी स्मृति रचनाएँ हमें कहानियों, उपदेशों और उदाहरणों के माध्यम से जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती हैं। सरल शब्दों में कहें तो, पुराण धर्म के गूढ़ वैदिक ज्ञान को जन-सामान्य तक पहुँचाने का एक सहज और व्यावहारिक साधन हैं।

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