पूर्ण भगवान कौन है?

धार्मिक ग्रंथों और आध्यात्मिक विचारधाराओं में जब बात पूर्ण भगवान की होती है, तो अक्सर परम अक्षर ब्रह्म का नाम लिया जाता है। यही वह अंतिम सत्ता है जिसे कई ऋषि-मुनि और विद्वान परमेश्वर मानते हैं। इन्हीं को सदाशिव भी कहा जाता है — वह अविनाशी, निराकार और सर्वव्यापी चैतन्य जो समस्त सृष्टि का आधार है।

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, सदाशिव स्वयं में एक हैं और फिर भी स्वेच्छा से सभी ओर विद्यमान हैं। वे न केवल निर्गुण हैं, बल्कि सगुण रूप में भी अपने दिव्य शरीर से शक्ति की उत्पत्ति करते हैं। यह शक्ति उनसे कभी अलग नहीं होती, मानो उनके स्वयं के अंग की तरह हो।

अर्वाचीन और प्राचीन दोनों तरह के विद्वान इसी सत्य की पुष्टि करते हैं कि ईश्वर का सच्चा स्वरूप वही है जो सबकुछ में व्याप्त है, फिर चाहे उसे शिव, ब्रह्म या अक्षर पुरुष के रूप में पुकारा जाए।

इस प्रकार, पूर्ण भगवान की अवधारणा केवल एक नाम या रूप तक सीम

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