पृथ्वी का अंत कब और कैसे होगा?
हमारी पृथ्वी और पूरी सृष्टि का भविष्य क्या होगा, यह सवाल इंसानी मन को सदियों से हैरान करता रहा है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस रहस्य को समझाने के कई तरीके बताए गए हैं।
हिन्दू पौराणिक मान्यताओं और श्रीमद्भागवत के अनुसार, समय की गणना चक्रों में बंटी हुई है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि का यह चक्र कल्पों के हिसाब से चलता है। दो कल्पों का समय पूरा होने पर इस पूरी सृष्टि का महाविनाश या प्रलय होता है। एक कल्प में कई महायुग या चतुर्युग बीतते हैं, और जब दो हजार चतुर्युगों का यह लंबा सफर पूरा होता है, तब पृथ्वी और ब्रह्मांड में प्रलय की स्थिति बनती है, जिसे सृष्टि का अंत कहा गया है।
हालांकि धार्मिक मान्यताएं इसे आध्यात्मिक और लंबे काਾਲिक चक्र के रूप में देखती हैं, वहीं विज्ञान की नजर में पृथ्वी का भविष्य सूर्य के जीवन से जुड़ा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों साल बाद जब सूर्य का ईंधन खत्म होना शुरू होगा और वह एक लाल दानव (रेड जायंट) तारे में बदलेगा, तब पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा।
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