पौराणिक मान्यताओं में पृथ्वी की उत्पत्ति और मां दुर्गा की कृपा
हिंदू पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में सृष्टि की रचना से जुड़े कई अद्भुत और रहस्यमयी प्रसंग मिलते हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक बार देवर्षि नारद जी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी की उत्पत्ति और उसके अस्तित्व के विषय में प्रश्न किया था। तब श्री हरि विष्णु ने बताया कि इस संपूर्ण भूमंडल के वर्तमान स्वरूप के निर्माण में मां दुर्गा की महान लीला छिपी हुई है।
कथा के अनुसार, सृष्टि के प्राकट्य काल में जब मधु और कैटभ नामक दो भयंकर दैत्यों का अस्तित्व था, उस समय पृथ्वी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती थी और चारों ओर जलमग्न स्थिति थी। जब जगतजननी मां दुर्गा ने इन असुरों का संहार किया, तब उनके शरीर से अत्यधिक मात्रा में 'मेद' (वसा) उत्पन्न हुआ।
कालंतर में सूर्य देव के प्रचंड तेज और ताप से वही मेद सूखता चला गया और उसने धीरे-धीरे कठोर धरातल का रूप ले लिया। इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप इस पृथ्वी का निर्माण हुआ। इसी कारण धार्मिक व पौराणिक संदर्भों में मां दुर्गा की अनुकंपा को ही इस धरा के जन्म और अस्तित्व का मुख्य आधार माना जाता है।
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