पृथ्वी की सबसे कमजोर परत: एस्थेनोस्फीयर

एस्थेनोस्फीयर पृथ्वी की एक ऐसी परत है जो गहराई में छिपी है, लेकिन इसका महत्व अत्यधिक है। यह पृथ्वी के ऊपरी मंडल में स्थित होते हुए भी यांत्रिक रूप से काफी कमजोर होती है। इसका नाम ग्रीक शब्द अस्थेनोस (अर्थात 'कमजोर') से लिया गया है, जो इसकी प्रकृति को सही तरीके से दर्शाता है।

यह परत सतह से लगभग 80 किमी से 200 किमी की गहराई पर शुरू होती है और लगभग 700 किमी तक फैली हुई है। यह लिथोस्फीयर (जिस पर हमारे महाद्वीप और महासागर टिके हैं) के ठीक नीचे स्थित है। एस्थेनोस्फीयर की यह नमनीय और धीमी गति वाली सामग्री प्लेट टेक्टॉनिक्स की गति को संभव बनाती है।

हालांकि यह परत ठोस है, लेकिन इतनी गर्म और दबाव में है कि यह धीरे-धीरे बह सकती है — मानो गाढ़ा शहद की तरह। इसी वजह से महाद्वीप इस पर तैरते हैं और समय के साथ धीरे-धीरे अपनी जगह बदलते हैं।

इस तरह, एस्थेनोस्फीयर पृथ्वी की सबसे कमजोर परत तो है ही,

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय