पृथ्वी पर प्रथम मानव: मनु और शतरूपा की कथा
भारतीय पौराणिक कथाओं और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, पृथ्वी पर सृष्टि के आरंभ में अवतरित होने वाले प्रथम पुरुष स्वयंभुव मनु और प्रथम स्त्री शतरूपा थीं। हिंदू धर्मग्रंथों में यह माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि के निर्माण के समय अपने संकल्प से इन्हें प्रकट किया था। चूंकि इनका जन्म किसी माता-पिता के गर्भ से नहीं हुआ था, इसलिए इन्हें 'स्वयं भू' यानी स्वयं उत्पन्न होने वाला कहा गया।
पौराणिक मान्यताओं के आधार पर, प्रथम मनु का आगमन आज से लगभग 4000 वर्ष पूर्व या उससे भी पहले माना जाता है। स्वयंभुव मनु और देवी शतरूपा के मिलन से ही मानव जाति का विस्तार आरंभ हुआ। इन्हीं की संतानों से संपूर्ण संसार के मनुष्यों की उत्पत्ति हुई, इसलिए सभी मनुष्यों को 'मानव' या 'मनुष्य' कहा जाता है, जिसका सीधा अर्थ है मनु की संतान।
मनु और शतरूपा ने न केवल संसार को आगे बढ़ाया, बल्कि समाज के संचालन के लिए नैतिक नियम, धर्म और सदाचार की नींव भी रखी। उन्हें संसार का पहला राजा और रानी भी माना जाता है, जिन्होंने मानव सभ्यता को एक सही दिशा दी।
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