सरकारी और प्राइवेट कंपनी में क्या बड़ा अंतर है?
आजकल व्यापार की दुनिया में दो तरह की कंपनियां सबसे ज्यादा चर्चा में रहती हैं—सरकारी (पब्लिक) कंपनी और प्राइवेट (निजी) कंपनी। भले ही दोनों का काम बिजनेस करना ही है, लेकिन इनके मालिकाना हक और काम करने के तरीकों में काफी फर्क होता है।
सरकारी या पब्लिक लिमिटेड कंपनी पर मुख्य रूप से सरकार और आम शेयरधारकों (जनता) का नियंत्रण होता है। इस तरह की कंपनी को शुरू करने के लिए कम से कम 7 सदस्यों की जरूरत होती है। ऐसी कंपनियां शेयर बाजार में अपने शेयर बेचकर जनता से पैसा जुटा सकती हैं। इसमें पारदर्शिता बहुत ज्यादा होती है और सरकार का सीधा हस्तक्षेप या निगरानी बनी रहती है।
दूसरी तरफ, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पूरी तरह से निजी लोगों या कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के स्वामित्व में होती है। इसे शुरू करने के लिए कम से कम 2 लोगों की आवश्यकता होती है। प्राइवेट कंपनियां अपने शेयर आम जनता को नहीं बेच सकतीं, इसलिए इनका नियंत्रण कुछ ही हाथों में रहता है। इसमें फैसले तेजी से लिए जाते हैं और कंपनी की अंदरूनी जानकारी गोपनीय रहती है।
सरल शब्दों में कहें तो, जहाँ सरकारी कंपनी का दायरा बड़ा और जनता से जुड़ा होता है, वहीं प्राइवेट कंपनी में स्वतंत्रता और सीमित लोगों का मालिकाना हक होता है।
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