प्रेगनेंसी में शरीर का काला पड़ना (पिग्मेंटेशन): कारण और सच्चाई

गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं. इन्हीं बदलावों में से एक है त्वचा का रंग गहरा होना या शरीर पर काली रेखाएं बनना. अक्सर देखा जाता है कि कई गर्भवती महिलाओं के पेट पर एक लंबी, गहरे भूरे या काले रंग की लाइन बन जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में लिनिया नाइग्रा (Linea Nigra) कहा जाता है.

यह काली रेखा पूरी तरह से हार्मोनल परिवर्तनों के कारण बनती है. प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स का स्तर तेजी से बढ़ता है. ये हार्मोन शरीर में मेलेनिन (त्वचा को रंग देने वाला तत्व) के उत्पादन को बढ़ा देते हैं, जिससे त्वचा के कुछ हिस्से ज्यादा गहरे नजर आने लगते हैं. पेट के अलावा ऐसी ही गहरी रेखाएं या पैच कभी-कभी कूल्हों, जांघों और गर्दन के आसपास भी देखे जा सकते हैं.

बहुत सी महिलाएं इसे देखकर घबरा जाती हैं, लेकिन यह गर्भावस्था का एक बेहद स्वाभाविक हिस्सा है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. आमतौर पर, शिशु के जन्म के बाद जैसे-जैसे हार्मोन्स का स्तर सामान्य होता है, यह कालापन और रेखाएं अपने आप धीरे-धीरे हल्की होने लगती हैं. इसलिए इस समय त्वचा पर किसी भी तरह के कड़े केमिकल या ब्लीच का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.

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