बच्चे इतने प्यारे और मासूम क्यों लगते हैं?
चाहे इंसान का बच्चा हो या किसी जीव का, उनकी मासूमियत हर किसी का दिल जीत लेती है। आखिर ऐसा क्यों है कि बच्चे हमें इतने प्यारे और आकर्षक लगते हैं? इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वे इस सांसारिक दुनिया की उलझनों, दुश्वारियों और चालाकियों से पूरी तरह अनजान होते हैं।
नवजात शिशु जिस मानसिक और आत्मिक दुनिया से आते हैं, वहाँ राग-द्वेष, ईर्ष्या, लोभ, क्रोध और अहंकार जैसी नकारात्मक भावनाओं का कोई नामोनिशान नहीं होता। उनके भीतर न तो कोई छल-कपट होता है और न ही झूठ या बेईमानी का कोई संस्कार। उनकी हर एक छोटी क्रिया, चाहे वह बिना बात के मुस्कुराना हो या अपनी तोतली आवाज़ में कुछ कहना, पूरी तरह से निश्छल और पवित्र होती है।
वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, बच्चों के चेहरे की बनावट—जैसे उनकी बड़ी-बड़ी मासूम आँखें, गोल गाल और कोमल त्वचा—बड़ों के भीतर स्वाभाविक रूप से स्नेह, वात्सल्य और सुरक्षा की भावना जगाती है। यह प्रकृति का एक अद्भुत नियम है जो हमें बिना किसी स्वार्थ के उनकी ओर आकर्षित करता है। बच्चों की यही निश्छल और बेदाग मुस्कान उन्हें इस दुनिया की सबसे खूबसूरत और जीवंत रचना बनाती है, जो किसी भी उदास मन को खुशियों से भर सकती है।
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