बीज और उनके मुख्य प्रकार

वनस्पति विज्ञान और कृषि में बीजों का बहुत बड़ा महत्व है। प्रकृति में जीवन के निरंतर चक्र को बनाए रखने के लिए बीज सबसे मूलभूत इकाई हैं। मुख्य रूप से बीजों को उनकी संरचना और कृषि उपयोग के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।

संरचनात्मक आधार पर बीजों के प्रकार

पौधों में बीजपत्रों (Cotyledons) की संख्या के अनुसार इन्हें दो मुख्य वर्गों में बांटा जाता है:

1. एकबीजपत्री (Monocotyledonous): इन बीजों में केवल एक ही बीजपत्र होता है। अंकुरण के समय इनसे केवल एक पत्ती निकलती है। उदाहरण के लिए गेहूं, मक्का, चावल और बाजरा।

2. द्विबीजपत्री (Dicotyledonous): इन बीजों के आवरण को हटाने पर दो बराबर भाग (बीजपत्र) दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए चना, मटर, मूंगफली और राजमा।

कृषि और प्रमाणीकरण के आधार पर प्रकार

कृषि विज्ञान में बीजों की शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इन्हें चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

मूल केंद्रक बीज (Nucleus Seed): यह पादप प्रजनक (वैज्ञानिक) द्वारा तैयार किया गया 100% अनुवांशिक रूप से शुद्ध बीज होता है।

प्रजनक बीज (Breeder Seed): यह मूल केंद्रक बीज से तैयार किया जाता है और इसकी शुद्धता भी उच्च स्तर की होती है।

आधार बीज (Foundation Seed): प्रजनक बीज की संतति को आधार बीज कहते हैं। इसका उपयोग आगे व्यावसायिक बीज तैयार करने में होता है।

प्रमाणित बीज (Certified Seed): आधार बीज से तैयार किया गया यह वह बीज है जिसे किसान अपनी फसलों की बुआई के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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