बेंगलुरु का नाम कैसे पड़ा?
बेंगलुरु आज भारत का एक प्रमुख तकनीकी हब है, लेकिन इस शहर का नाम बहुत पुराने इतिहास से जुड़ा है। 800 ईस्वी से पहले भी एक बस्ती के रूप में यहां लोग रहते थे, हालांकि वह बस्ती आज के बेंगलुरु जैसी नहीं थी।
शहर के वास्तविक संस्थापक माने जाते हैं – केम्पे गौड़ा। माना जाता है कि जब उन्होंने 16वीं शताब्दी में एक नए शहर के निर्माण का फैसला किया, तो उन्होंने अपनी मां के जन्मस्थान के नाम पर इस शहर का नाम रखा। उनकी मां पुराने बेंगलुरु की रहने वाली थीं। इसलिए जब उन्होंने नए शहर की स्थापना की, तो उसे भी बेंगलुरु कहा गया।
कई लोग मजाक में कहते हैं कि "बेंगलुरु" का मतलब "उबले हुए दाल का शहर" है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह नाम भाषाई या भौगोलिक विकास का हिस्सा है। कन्नड़ में "बेंगलूरु" का उच्चारण प्राचीन काल से चला आ रहा है।
आज यह शहर आईटी की दुनिया में चमकता है, लेकिन इसका नाम एक साधारण, लेकिन भावन
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।