ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं की जाती?
सनातन धर्म में त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—को सृष्टि का आधार माना गया है। जहां भगवान विष्णु और शिव जी के दुनिया भर में अनगिनत मंदिर हैं और उनकी नियमित पूजा होती है, वहीं सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की पूजा नहीं की जाती है। पूरे विश्व में उनका एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। इसके पीछे पौराणिक कथाओं में एक गहरा कारण बताया गया है।
पौराणिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर धरती पर अग्नि यज्ञ के लिए एक उचित और पवित्र स्थान की तलाश कर रहे थे। जब वे सही स्थान की खोज कर रहे थे, तब एक ऐसी घटना घटी जिसके कारण उनकी पत्नी देवी सावित्री अत्यधिक क्रोधित हो गईं और उन्होंने ब्रह्मा जी को एक कठोर श्राप दे दिया।
देवी सावित्री के इसी श्राप के कारण ही ब्रह्मांड के रचयिता होने के बावजूद ब्रह्मा जी की पूजा करना पूरी तरह से वर्जित मान लिया गया। ऐसा कहा जाता है कि इस श्राप के असर के चलते ही पुष्कर को छोड़कर संसार में कहीं भी उनकी सार्वजनिक रूप से पूजा नहीं की जाती है, ताकि सृष्टि का संतुलन बना रहे और धार्मिक नियमों का पालन हो सके।
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