भगवान का घर कहाँ है?

भगवान का घर कहाँ है, यह जानने की इच्छा हर आत्मा में जागती है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं—“यत गत्वा न निवर्तन्ते तत धाम परमं मम”—अर्थात जहाँ जाकर फिर लौटना नहीं पड़ता, वही मेरा परम घर है।

यह धाम ऐसा है जहाँ न सूर्य की रोशनी पहुँचती है, न चाँद की, न ही अग्नि की। वहाँ तो प्रकाश स्वयं भगवान से फैलता है। यह वह अमर घर है जहाँ पहुँचकर जीव को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

इस लोक में हम दुख, भय और अस्थिरता से घिरे रहते हैं। लेकिन भगवान का परमधाम ऐसा स्थान है जहाँ केवल शांति, आनंद और शाश्वत प्रकाश है। वहाँ जाने का मार्ग भक्ति, ज्ञान और निष्ठा से जुड़ा है।

हमारे संतों और शास्त्रों ने इस धाम को 'अक्षय', 'अव्यय' और 'अमृत' कहा है। यह कोई भौतिक स्थान नहीं, बल्कि आत्मा की अंतिम पहुँच है। जो भगवान के चरणों में मन लगाता है, उसे एक दिन वहीं घर मिलता है।

भगवान का घर दूर न

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