संसार के प्रथम पुरुष: स्वायंभुव मनु की कथा
सनातन धर्म और हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस संसार के सबसे पहले पुरुष स्वायंभुव मनु थे और उनके साथ प्रकट होने वाली पहली स्त्री का नाम शतरूपा था। सृष्टि की रचना के क्रम में इन दोनों का प्राकट्य बेहद अनूठा और दिव्य माना जाता है।
पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि जब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड के विस्तार के लिए 11 प्रजापतियों और 11 रुद्रों की रचना की, तब भी सृष्टि के सुचारू संचालन के लिए मानव रूप की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए ब्रह्मा जी ने स्वयं को दो भागों में विभाजित कर लिया। उनके इस विभाजन से दो दिव्य रूप सामने आए, जिन्हें 'का' और 'या' नाम दिया गया। इन्हीं रूपों से काया यानी शरीर की उत्पत्ति की अवधारणा जुड़ी है।
भगवान ब्रह्मा के शरीर के पहले भाग से स्वायंभुव मनु का जन्म हुआ, जो धरती के प्रथम मानव कहलाए। वहीं उनके दूसरे भाग से देवी शतरूपा प्रकट हुईं, जिन्हें संसार की पहली महिला माना जाता है। इन दोनों के मिलन से ही आगे चलकर मानव सभ्यता का विकास हुआ और संसार में जनसंख्या का विस्तार शुरू हुआ। यही कारण है कि मनु की संतान होने की वजह से ही हम सभी को 'मनुष्य' या मानव कहा जाता है। यह प्राचीन कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति और मानव का अस्तित्व एक ही परम चेतना से जुड़ा हुआ है।
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