भगवान का वास्तविक भोजन क्या है?
अक्सर लोग ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए छप्पन भोग, फल और मिठाइयाँ अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि संपूर्ण सृष्टि के रचयिता, जिन्हें किसी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं है, उनका वास्तविक भोजन क्या है? हमारे आध्यात्मिक ग्रंथों और संतों के अनुसार, परमात्मा का असली भोजन मनुष्य का अहंकार है।
ईश्वर को भौतिक पकवानों की भूख नहीं होती, बल्कि वे मनुष्य के भीतर छिपे घमंड और 'मैं' की भावना का ग्रास करते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को सर्वोपरि समझने लगता है और उसमें अभिमान आ जाता है, तो भगवान किसी न किसी रूप में उसके इस अहंकार को नष्ट कर देते हैं। इतिहास गवाह है कि रावण, कंस और हिरण्याक्ष जैसे महान बलशालियों का अंत भी उनके इसी अहंकार के कारण हुआ था।
वास्तव में, जब परमात्मा किसी का अहंकार छीनते हैं, तो वह उनकी सजा नहीं बल्कि कृपा होती है। अहंकार के मिटते ही मनुष्य के भीतर सच्ची भक्ति, सरलता और प्रेम का संचार होता है। इसलिए, यदि ईश्वर को कुछ अर्पित ही करना है, तो अपने अहंकार और बुरे विचारों को उन्हें सौंप दें। यही उनकी सबसे बड़ी सेवा और तृप्ति है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।