पासपोर्ट बनवाने की सही उम्र और जरूरी नियम
भारत में पासपोर्ट बनवाने के लिए उम्र की कोई न्यूनतम सीमा नहीं होती है। आप एक दिन के नवजात शिशु से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति का पासपोर्ट बनवा सकते हैं। नियमों के मुताबिक, नाबालिगों (Minors) के पासपोर्ट की समय-सीमा और प्रक्रिया को उम्र के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है ताकि बच्चों के लिए इसे आसान बनाया जा सके।
15 साल तक के बच्चों के लिए: यदि बच्चे की उम्र एक दिन से लेकर 15 साल के बीच है, तो उनका पासपोर्ट आसानी से बन जाता है। इस उम्र के बच्चों के पासपोर्ट की वैधता आमतौर पर 5 साल या उनके 18 साल के होने तक (जो भी पहले हो) होती है। इसके लिए बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती है। माता-पिता के वैध पासपोर्ट और बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर इसे आसानी से बनवाया जा सकता है। इसमें माता-पिता के दस्तावेजों की भूमिका अहम होती है।
16 से 18 साल के किशोरों के लिए: जब बच्चा 16 साल की उम्र पार कर लेता है, तो नियम थोड़े बदल जाते हैं। 16 से 18 साल के किशोरों (Teenagers) के पास यह विकल्प होता है कि वे 10 साल की पूरी वैधता वाला पासपोर्ट बनवा सकें। हालांकि, वे चाहें तो 18 साल की उम्र पूरी होने तक का शॉर्ट-वैलिडिटी पासपोर्ट भी चुन सकते हैं। वयस्क (Adult) पासपोर्ट की तरह 10 साल की वैधता का लाभ उठाने के लिए फीस और प्रक्रिया में थोड़े बदलाव होते हैं।
जैसे ही कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र पूरी कर लेता है, वह वयस्क श्रेणी में आ जाता है और उसका पासपोर्ट सामान्य नियमों के तहत पूरे 10 साल के लिए जारी किया जाता है। इसलिए, अगर आपके घर में कोई छोटा बच्चा या किशोर है, तो आप बिना किसी हिचकिचाहट के उनके पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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