भारत माता क्यों कहे जाते हैं?
आज अगर हम भारत को 'भारत माता' कहते हैं, तो इसके पीछे एक गहरा ऐतिहासिक और भावनात्मक आधार है। देश के प्रति प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए इसे माता के रूप में देखा जाने लगा।
इस विचार को बल देने में बंगला लेखक किरण चंद्र बनर्जी का बहुत बड़ा योगदान रहा। साल 1873 में उन्होंने एक नाटक लिखा, जिसका नाम था 'भारत-माता'। इस नाटक में भारत को एक मातृ रूप में प्रस्तुत किया गया, जो अपने बच्चों—अर्थात देशवासियों—के लिए सदैव त्याग और प्रेम करती है।
उस समय, खासकर बंगाल में, दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं थी, बल्कि यह लोगों को जोड़ने का एक माध्यम भी थी। इन पूजा सभाओं में लोग आपस में स्वराज यानी आजादी की चर्चा करते थे। भारत माता की छवि इसी पृष्ठभूमि में जन्मी—एक ऐसी माँ, जो अपने बच्चों से आजादी के लिए लड़ने की प्रेरणा मांगती है।
धीरे-धीरे यह विचार पूरे देश में फैल गया। 'भारत माता की जय' क
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।