भगवान के चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ क्यों नहीं?

कई बार हमने सोचा होगा कि भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध या महावीर की मूर्तियों या चित्रों में उनके चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ क्यों नहीं होती? यह सवाल सिर्फ दिखावे से ज्यादा गहरा है।

भगवान की छवि मानवीय लिंग-भेद से परे होती है। जब कोई पुरुष पूर्णता के शिखर को छूता है, तो वह न सिर्फ पुरुषत्व, बल्कि स्त्रीगुणों की समष्टि भी बन जाता है। ऐसी स्थिति में बाहरी लक्षणों जैसे दाढ़ी-मूंछ की जरूरत नहीं रह जाती।

हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में भगवान को अक्सर निर्लिंग या समलिंगी रूप में दिखाया गया है। विष्णु के कल्याण रूप, शिव का अर्धनारीश्वर रूप, बुद्ध का शांत स्वरूप — सभी में चेहरे की बालों का अभाव जानबूझकर है। यह निशानी नहीं कि वे पुरुष नहीं हैं, बल्कि यह कि वे हर रूप के पार हैं।

इसलिए भगवान के चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ न होना सिर्फ कलात्मक पसंद नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतीक है। व

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