भगवान मनुष्य से क्या चाहते हैं?
भगवान मनुष्य से कुछ नहीं चाहते — यह सुनकर शायद किसी को अजीब लगे, लेकिन यही सच है। भगवान निरपेक्ष हैं, अर्थात् वे किसी चीज़ के लिए आश्रित नहीं हैं। वे पूर्ण हैं, स्वयं में समाहित हैं। तो फिर मनुष्य जैसा सीमित प्राणी उन्हें क्या दे सकता है? न कुछ दृश्यमान दे सकता है, न अदृश्य। देने वाला भी तो वही है, जो सब कुछ बनाता है।
हमारी सोच अक्सर इस तरह की होती है कि मानो भगवान को कुछ चाहिए — पूजा, प्रार्थना, भोग, यज्ञ। लेकिन अगर गहराई से देखें, तो यह सब हमारी आस्था की अभिव्यक्ति है, उनकी आवश्यकता नहीं। भगवान ने अनंत ब्रह्मांड बनाए हैं। उस विशालता में मनुष्य एक क्षणिक बिंदु मात्र है। हमारा अस्तित्व भी उसी सृष्टि का हिस्सा है, जिसे वही बना रहे हैं।
इसलिए सवाल यह नहीं कि भगवान हमसे क्या चाहते हैं, बल्कि यह है कि हम उनके प्रति क्या भाव लेकर जी रहे हैं। क्या हम अपने कर्मों में नम्रता, सच्चाई और प्रेम लाएं? यही व
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