भगवान विष्णु: ब्रह्मांड के पालनहार

सनातन धर्म में भगवान विष्णु को त्रिदेवों में से एक माना गया है, जिन्हें इस संपूर्ण सृष्टि का पालनहार और रक्षक कहा जाता है। जहाँ भगवान ब्रह्मा को इस संसार का निर्माता और भगवान शिव को संहारक माना गया है, वहीं विष्णु जी इस पूरी सृष्टि को सुचारू रूप से चलाने और इसका संतुलन बनाए रखने का दायित्व संभालते हैं। वे प्रेम, करुणा और शांति के प्रतीक हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान रहते हैं। उनकी चार भुजाएँ हैं, जिनमें वे शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल का फूल) धारण करते हैं। ये चारों वस्तुएं जीवन के विभिन्न स्तंभों—जैसे सही दिशा, समय चक्र, शक्ति और पवित्रता—का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी हैं, जो धन, समृद्धि और वैभव की देवी हैं।

जब-जब धरती पर पाप, अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु धर्म की स्थापना और मानवता की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। उन्हें दशावतार के लिए जाना जाता है, जिनमें से भगवान राम और भगवान कृष्ण के रूप में उनके अवतार सबसे प्रमुख और पूजनीय माने जाते हैं। उनके इन रूपों ने समाज को मर्यादा, कर्म और भक्ति का सच्चा मार्ग दिखाया है।

संक्षेप में कहें तो, भगवान विष्णु केवल एक देवता नहीं हैं, बल्कि वे ब्रह्मांड की उस सकारात्मक ऊर्जा का रूप हैं जो हमें सही राह पर चलने की प्रेरणा देती है और हर संकट में संसार की रक्षा करती है।

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