जकात: मुसलमानों का धार्मिक कर्तव्य

इस्लाम में जकात एक महत्वपूर्ण धार्मिक अभ्यास है और इस्लाम के पांच मुख्य स्तंभों में से एक मानी जाती है। यह कोई सरकारी कर नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक दायित्व है, जिसे हर सक्षम मुसलमान को निश्चित दौलत पर 2.5% राशि गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों को दान करके निभाना होता है।

जकात केवल मुसलमानों पर लागू होती है और इसका उद्देश्य समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखना है। यह उनकी बचत पर लगती है – नकदी, सोना, चांदी या व्यापार से हुई आय जो एक निश्चित सीमा (निसाब) से ऊपर हो। इसे पैसे के बजाय भी दिया जा सकता है, जैसे अनाज, मवेशी या अन्य संपत्ति।

इतिहास में, इस्लामिक राज्य जकात को एक संगठित तरीके से एकत्र करते थे और इसका उपयोग गरीबों, यतीमों, कर्जदारों और यात्रियों की सहायता के लिए किया जाता था। आज भी कई मुस्लिम बचत पर जकात देते हैं, हालांकि यह पूरी तरह वैयक्तिक विश्वास पर निर्भर करता है।

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