भगवान और कर्म का संतुलन
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तक्लीफ आती है, तो भगवान हमारी मदद करते हैं। लेकिन सच यह है कि भगवान किसी की सीधे मदद नहीं करते। जीवन का हर सुख-दुख हमारे अपने कर्मों का परिणाम है। जैसा बोओगे, वैसा काटोगे – यही कर्म का सिद्धांत है।
हमारे आसपास के सभी जीव, चाहे वे चेतन हों या जड़, सभी कर्मों के जाल में एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसीलिए सच्चे साधु या उच्च कोटि के संन्यासी दुनियादारी से दूर रहते हैं। वे जानते हैं कि अगर वे सांसारिक लोगों के संपर्क में आएंगे, तो उनके कर्म-फल भी उन्हें झेलने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि वे तप करते हैं, मौन धारण करते हैं और आत्मा की शुद्धि में लगे रहते हैं।
यह समझना ज़रूरी है कि हमारी मदद स्वयं हमारे कर्म करते हैं। अच्छाई से काम करो, तो अच्छा फल मिलता है। बुराई से बचो, क्योंकि वह भी लौटकर हमें ही छूती है। भगवान कोई न्यायाधीश नहीं जो सजा या पुरस्कार दे, बल्कि वे तो केवल उस नियम के प्रतीक हैं जो हर
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