भारत और रूस की अटूट दोस्ती की शुरुआत
भारत और रूस के बीच के संबंध समय के साथ और भी ज्यादा मजबूत होते गए हैं। दोनों देशों की यह गहरी दोस्ती दुनिया भर के लिए हमेशा से एक मिसाल रही है। साल 1971 के ऐतिहासिक समझौतों के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों का रिश्ता और अधिक प्रगाढ़ हो गया था। वैश्विक राजनीति में इस मजबूत साझेदारी ने कई देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
इस रिश्ते में एक खास और यादगार मोड़ तब आया जब सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव एक आधिकारिक दौरे पर भारत आए थे। उस समय कूटनीतिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी उनका स्वागत करने के लिए सीधे हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) पहुंच गए थे। इस गर्मजोशी भरे स्वागत ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच के आपसी भरोसे और व्यक्तिगत तालमेल को पूरी दुनिया के सामने जाहिर कर दिया था।
दशकों बीत जाने के बाद भी, भारत और रूस की यह दोस्ती आज भी उतनी ही मजबूत है। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे के भरोसेमंद साझीदार बनकर खड़े हैं। यह ऐतिहासिक रिश्ता इस बात का प्रमाण है कि सच्ची मित्रता विपरीत परिस्थितियों में भी समय की कसौटी पर खरी उतरती है।
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