भारत के असली मूलवासी कौन हैं?

अक्सर यह सवाल हमारे समाज में चर्चा का विषय बनता है कि भारत के मूल मालिक या मूलनिवासी कौन हैं? ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इस सवाल के दो अलग-अलग पहलू हैं—एक है कानूनी नागरिकता और दूसरा है ऐतिहासिक प्राचीनता।

आज के समय में ईसाई, पारसी, यहूदी, विभिन्न जातियां (जैसे ओबीसी, दलित), घुमंतु समुदाय, और सदियों पहले बाहर से आए हूँण, कुषाण, शक, मंगोल या मुगल—इन सभी के वंशज जो भारत की धरती पर रह रहे हैं और जिनके पास यहाँ की नागरिकता है, वे कानूनी तौर पर भारत के मूलनिवासी हैं। भारत का संविधान हर उस व्यक्ति को देश का बराबर का मालिक मानता है जो यहाँ का नागरिक है।

लेकिन अगर हम इतिहास की गहराइयों में जाएं और यह देखें कि इस भूमि के सबसे पहले और असली निवासी कौन थे, तो भारत के मूलवासी केवल यहाँ के आदिवासी हैं। आदिवासी समुदाय सदियों से, बिना किसी बाहरी प्रभाव के, इस देश के जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक संसाधनों के साथ जुड़े रहे हैं। वे इस धरती की सबसे पुरानी संस्कृति और धरोहर के रक्षक हैं। संक्षेप में कहें तो, कानूनी रूप से आज हर भारतीय नागरिक इस देश का मालिक है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से भारत की आदिम पहचान सिर्फ आदिवासियों से ही जुड़ी है।

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