भारत और चीन के बीच कर्ज का सच
भारत और चीन के आर्थिक संबंधों को लेकर अक्सर तरह-तरह के आंकड़े और सवाल सामने आते हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति यह है कि भारत ने चीन की सरकार से प्रत्यक्ष रूप से कोई द्विपक्षीय सरकारी कर्ज (Bilateral Debt) नहीं लिया है। भारत सरकार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों के लिए मुख्य रूप से घरेलू बाजार और वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों पर निर्भर रहती है।
कई बार भ्रम की स्थिति बहुपक्षीय विकास बैंकों के कारण पैदा होती है। उदाहरण के लिए, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) में चीन सबसे बड़ा शेयरधारक है, जबकि भारत दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है। भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए AIIB जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकों से वित्तपोषण प्राप्त किया है, जिसे चीन का सीधा कर्ज नहीं माना जाता।
भारत का कुल विदेशी कर्ज मुख्य रूप से बहुपक्षीय सहायता, वाणिज्यिक उधार और अनिवासी भारतीय जमा (NRI Deposits) के रूप में विभाजित है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सख्त और सुरक्षित ऋण प्रबंधन नीतियों का पालन करता है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।