भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार: क्यों बनी हुई है आयात पर निर्भरता?
भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों पर जोर दे रही है। इसके बावजूद, भारत द्वारा चीन से किए जाने वाले आयात के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। सवाल यह उठता है कि रणनीतिक तनाव और ठोस प्रयासों के बाद भी भारत चीन से सामान क्यों खरीद रहा है?
इसका मुख्य कारण भारत की औद्योगिक और निर्माण आवश्यकताओं से जुड़ा है। भारत चीन से केवल तैयार सामान ही नहीं मंगवाता, बल्कि भारतीय उद्योगों को चलाने के लिए आवश्यक मध्यवर्ती सामान (Intermediate Goods) और भारी मशीनरी पर उसकी भारी निर्भरता है। विशेष रूप से भारत का प्रसिद्ध दवा उद्योग (Pharmaceutical Sector) दवाओं को बनाने के लिए लगने वाले सक्रिय दवा सामग्री (API) के लिए बड़े पैमाने पर चीनी आपूर्ति पर निर्भर है। यदि यह आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत के स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और ऑटोमोबाइल उद्योगों के लिए जरूरी पार्ट्स और मशीनरी चीन से किफायती दरों पर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। भारतीय कंपनियों को अपनी उत्पादन लागत कम रखने और बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इन सामानों का आयात करना पड़ता है। हालांकि भारत स्थानीय विनिर्माण (Manufacturing) को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है, लेकिन सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने में समय लगता है। यही कारण है कि आयात कम करने के प्रयासों के बावजूद भारत की चीनी आपूर्ति पर निर्भरता फिलहाल बनी हुई है।
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